पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान, अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया में कागज के बाप्पा की बढ़ी मांग

पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान, अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया में कागज के बाप्पा की बढ़ी मांग

मुंबई : पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी के मद्देनजर इस बार गणेशोत्सव में इकोप्रâेंडली गणेश मूर्ति की मांग बढ़ रही है। मिट्टी से बनने वाली इकोप्रâेंडली मूर्ति के वजनी होने की वजह से विदेश में इस बार कागज की मूर्तियों की मांग ज्यादा है। ये हल्की होती हैं। बड़ी संख्या में कागज की बनी मूर्तियों को यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, जर्मनी, इंग्लैंड आदि देशों में भेजा जा रहा है। यह जानकारी प्रथमेश इकोप्रâेंडली संस्था के अध्यक्ष प्रदीप गाजकोश ने दिया है।

कोरोना की दूसरी लहर भले ही नियंत्रण में है पर तीसरी संभावित लहर आने की आशंका जताई जा रही है। इसलिए प्रशासन ने भक्तों से सादगी पूर्वक घरों में सुरक्षित गणेशोत्सव मनाने की अपील की है। अन्य देशों में भी कमोबेश यही परिस्थिति है। कोरोना पर काबू पाने के लिए यूरोप, अमेरिका तथा सिंगापुर सहित अनेक देशों में कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं। विदेशों में ध्वनि, वायु तथा जल प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसीलिए वहां इन इकोप्रâेंडली मूर्तियों की विशेष मांग है। गाजकोश ने बताया कि कोरोना काल के पूर्व विदेशों से जनवरी महीने से ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते थे। असमंजस की वजह से इस वर्ष देरी हुई है। ऑर्डर के हिसाब से वजन में हल्का डेढ़ से दो फुट ऊंची मूर्तियों को अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड तथा ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में विमान से रवाना कर दिया गया है। चिकनी मिट्टी से बनी इकोप्रâेंडली मूर्तियों की अपेक्षा कागज से बनी मूर्तियां थोड़ी महंगी होती हैं पर बेहद हल्की होने की वजह से इसकी मांग ज्यादा है। मूर्ति के निर्माण में ६० प्रतिशत कागज, ३० प्रतिशत गोंद तथा १० प्रतिशत गुजरात की सफेद मिट्टी का उपयोग किया जाता है। अभिनेत्री रानी मुखर्जी मुंबई स्थित अपने घर पर पिछले कई वर्षों से गणेशोत्सव में कागज की बनी गणेश मूर्ति ही स्थापित करती हैं।


लोगसत्ता न्यूज
Anilkumar Upadhyay