शेल्टर मॉनिटरिंग कमिटी के निर्देशानुसा बेघरों का सर्वेक्षण

शेल्टर मॉनिटरिंग कमिटी के निर्देशानुसा बेघरों का सर्वेक्षण

मुंबई, महानगर क्षेत्र में देशभर से लोग रोजी-रोटी के लिए आते हैं, इसके अलावा यहां के निवासी लोगों में भी परिवार बढ़े हैं। सवा करोड़ की आबादीवाले इस सपनों के शहर में मुंबईकरों का पहला सपना नौकरी और फिर मकान है। जिन लोगों के ये सपने अब भी अधूरे हैं, ऐसे लोगों को मनपा तलाश करेगी और भविष्य में उनके मकान के सपने को पूरा करने के प्लान पर काम करेगी। जी हां, मनपा ने मुंबई में बेघरों की तलाश के लिए सर्वेक्षण कराने का पैâसला किया है। इसके लिए एक कंपनी नियुक्त कर उसे सर्वेक्षण का काम सौंपा जाएगा। सर्वेक्षण कंपनी ९० दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
मनपा की ओर से इस सर्वेक्षण को मोबाइल ऐप के जरिए कराया जाएगा। एक वेबसाइट बनाई जाएगी, जिसे ऐप से सीधे जोड़ा जाएगा। लोग मोबाइल ऐप पर घर न होने के साथ पूरी जानकारी सांझा करेंगे। इस कार्य के लिए रुचि रखने वाली कंपनियों से प्रस्ताव मंगवाया गया है। मनपा सर्वेक्षण के लिए २५ लाख रुपए खर्च करेगी। इस मामले में मनपा का प्लानिंग विभाग काम पर जुटा है।
वर्ष २०१७ में बेघरों के एक सर्वेक्षण का खुलासा हुआ था, जिसमें एक करोड़ २४ लाख आबादी वाले मुंबई शहर में मात्र ११,९१५ लोग बेघर बताए गए थे। इस रिपोर्ट पर शंका जाहिर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शेल्टर मॉनिटरिंग कमिटी का गठन किया। कमेटी के निर्देशानुसार यह सर्वेक्षण कराया जा रहा है।


लोगसत्ता न्यूज
Anilkumar Upadhyay