महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी से BJP के खिलाफ लामबंद होगा संयुक्त विपक्षी मोर्चा?

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी से BJP के खिलाफ लामबंद होगा संयुक्त विपक्षी मोर्चा?

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को कथित मनी लॉन्ड्रिंग और दाऊद इब्राहिम के परिवार के साथ संबंधों के आरोप में ईडी ने गिरफ्तार किया है. आठ घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें एक विशेष अदालत के सामने पेश किया गया. सूत्रों के मुताबिक नवाब मलिक से आतंकी दाऊद के साथियों के साथ कथित लेन-देन और जमीन के सौदे को लेकर पूछताछ की गई थी. बता दें कि महाराष्ट्र के मंत्री 3 मार्च तक ईडी की हिरासत में रहेंगे. हालांकि नवाब मलिक ने उन पर लगे सभी आरोपों का खंडन करते हुए ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. वहीं एनसीपी और इसके सहयोगी नवाब मलिक का समर्थन कर रहे हैं. बता दें कि अब इस मुद्दे पर बीजेपी (BJP) के खिलाफ विपक्षी मोर्चा लामबंद होने की तैयारी में है.

पिछले दिनों, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मुलाकात की थी. इस मुलाकात का मकसद 2024 के चुनावों से पहले बीजेपी का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय दलों का विरोधी मोर्चा बनाने की संभावना तलाशना था. इस बैठक के बाद शिवसेना और एनसीपी नेताओं ने ऐलान किया था कि कांग्रेस के बिना ऐसा कोई गठबंधन काम नहीं करेगा. अब महा विकास अघाड़ी सरकार को मलिक की गिरफ्तारी से बड़ा झटका लगा है. एनसीपी नेता नवाब मलिक के आवास पर ईडी के अधिकारियों की छापेमारी के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है. 

महाविकास अघाड़ी नेता इसे हमेशा की तरह राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता इसे बीजेपी का एनसीपी पर हमला करार दे रहे हैं. उनका कहना है कि देश भर में बीजेपी विरोधी गठबंधन बनाने के उनकी कोशिशों को नाकाम करने के लिए बीजेपी ने ये साजिश रची है. हालांकि ईडी द्वारा की गई कार्रवाई में एक नेता के अवैध तरीकों से धन इकट्ठा करने के लिए सामान्य अभियोजन से आगे जाने की पूरी गुंजाइश है. ईडी ने आरोप लगाया है कि नवाब मलिक के दाऊद की बहन और भाई से जुड़े अंडरवर्ल्ड गैंगस्टरों के साथ संबंध हैं. करोड़ों रुपए की जमीन को एनसीपी नेता ने औने-पौने दाम पर खरीदा था. कहा गया है कि मुंबई के कुर्ला में हुए इस जमीन के सौदे में दाऊद का सहयोगी शाहवली खान और दाऊद की बहन हसीना पारकर का सुरक्षाकर्मी सलीम पटेल शामिल था.

ईडी के मुताबिक तीन एकड़ की जमीन को हसीना पारकर ने कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए हासिल किया था. कहा जा रहा है कि नवाब मलिक को 80 लाख रुपए में इस जमीन को बेचा गया था. बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल नवंबर में इस मुद्दे को उठाया था, तब नवाब मलिक ने इसका खंडन किया था. उन्होंने दावा किया था कि पटेल ने आरोप को चुनौती देने के लिए मानहानि का मुकदमा दायर किया है. यूपी में चल रहे विधानसभा चुनाव के बीच नवाब मलिक की गिरफ्तारी का मुद्दा बीजेपी के लिए इस्लामोफोबिया को बढ़ाने और हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के काम आ सकता है. इस बीत शरद पवार ने कहा है कि दो दशक पहले उन पर भी अंडरवर्ल्ड से संबंध होने का आरोप लगाया गया था.

नवाब मलिक ने बीजेपी नेताओं के साथ-साथ सीबीआई, एनसीबी, ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. ये एजेंसियां एमवीए नेताओं की कई मामलों में जांच कर रही हैं. जांच के दायरे में पवार के भतीजे और वित्त मंत्री अजीत पवार, अनिल देशमुख, हसन मुशरीफ, अनिल परब, संजय राउत और उनके परिवार के सदस्य, मलिक और उनके दामाद समीर खान, एकनाथ खडसे, प्रताप सरनाइक, भावना गवली, अर्जुन खोटकर और छगन भुजबल भी शामिल हैं, जिन्हें महाराष्ट्र सदन पुनर्निर्माण विवाद में बरी कर दिया गया था.

अगर एमवीए नेताओं ने कोई गलत काम किया है तो उनके द्वारा खेला जाने वाला “विक्टिम कार्ड” कोई बहाना नहीं हो सकता. नौकरशाही किसी भी व्यक्ति के खिलाफ क़ानून के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, चाहे उसका कद कितना भी बड़ा हो. महाराष्ट्र में चल रही इस लड़ाई के कानूनी और राजनीतिक दो पहलू हैं. जहां जांच एजेंसियों से अदालत में फूलप्रूफ मामले पेश करने की उम्मीद की जाती है, वहीं आरोपियों को भी अपना बचाव करने का मौका मिलता है. नवाब मलिक की गिरफ्तारी के मुद्दे को बीजेपी अपने फायदे के लिए भुना सकती है चो वहीं बीजेपी विरोधी पार्टियां भी इसे लामबंद होने के लिए बतौर हथियार इस्तेमाल कर सकती है. बता दें कि नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी एकता जताने के लिए शरद पवार को फोन किया था.



लोगसत्ता न्यूज
Anilkumar Upadhyay