मुंबई में कभी उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत की राजनीति करने वाले राज ठाकरे को अचानक क्यों प्यारा लगने लगा है यूपी?

मुंबई में कभी उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत की राजनीति करने वाले राज ठाकरे को अचानक क्यों प्यारा लगने लगा है यूपी?

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र खासकर मुंबई में कभी उत्तर भारतीयों के साथ नफरत की राजनीति करके महाराष्ट्र में अपनी सत्ता की जड़ों को जमाने वाले राज ठाकरे को उत्तर प्रदेश अब प्यारा लगने लगा है। राज ठाकरे की राजनीति की "लाइन लेंथ" के लिहाज से उन्हें अब न सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शासन बेहतर लग रहा है, बल्कि योगीराज की तुलना वह पूरे महाराष्ट्र में कर रहे हैं। और तो और अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र में होने वाले अलग-अलग चुनावों में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए अब महाराष्ट्र के नेता उत्तर प्रदेश की मिट्टी से अपने प्रदेश की राजनीति में खाद-पानी देने की तैयारी कर रहे है। इस कड़ी में महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे अयोध्या पहुंच रहे हैं। जबकि उसके कुछ दिनों बाद राज ठाकरे अयोध्या की मिट्टी से तिलक कर महाराष्ट्र में चुनावी बिगुल बजाने की रणनीति बना चुके हैं।

महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनाव और उसके बाद लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में राजनीतिक जमीन की उर्वरा करने के लिए खाद-पानी उत्तर प्रदेश की जमीन से ही तैयार किया जा रहा है। इसके लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और सरकार में कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे रामलला के दर्शन करने के लिए मई में अयोध्या पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र के राजनीतिक मामलों के जानकार और पूर्व मंत्री जेएस राव देशमुख कहते हैं कि शिवसेना के नेता आज नहीं लंबे अरसे से अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आते हैं। आदित्य ठाकरे के अयोध्या आने और रामलला के दर्शन करने को बिल्कुल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। जगत राव कहते हैं लेकिन इस मामले पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे जरूर राजनीति कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इस वक्त जिस तरीके से महाराष्ट्र में माहौल राज ठाकरे ने बनाया है वह पूरी तरीके से संविधान के खिलाफ है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के मामलों के जानकार ओम प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि उन्होंने बाला साहब ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे तक को अयोध्या में आकर रामलला के दर्शन करके मत्था टेकते हुए देखा है। वह कहते हैं कि महाराष्ट्र में कट्टर हिंदुत्व की पार्टी शिवसेना आज ही नहीं बल्कि हमेशा से अयोध्या का आशीर्वाद लेकर ही राजनीति करती आई है। अब जब महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं और राजनीतिक हालात बदले हुए हैं तो मौके की तलाश में राज ठाकरे अब अयोध्या से महाराष्ट्र की जमीन को राजनीतिक रूप से उर्वरा करने की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि जिस तरीके से महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर को उतारने के लिए एक अलग तरीके का अभियान छेड़ा है, और उसी दौरान अयोध्या में रामलला के दर्शन करने की योजना बनाई है, वह राजनीति ही है। ऐसे में यह कहना कि अयोध्या में रामलला के दर्शन कर वापस जाना महाराष्ट्र के बड़े नेताओं का मकसद होगा, ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है।

राजनीतिक विश्लेषक ओपी शुक्ला कहते हैं कि कट्टर हिंदुत्व वाली पार्टी शिवसेना का उत्थान महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों को निशाने पर लेने के साथ शुरू हुआ था। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे से अलग होकर जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन कर राज ठाकरे ने अपनी राजनीति शुरुआत की तो उनके लिए भी प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में उत्तर भारतीय ही निशाने पर रहे। महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से समझने वाले हरीश वाड़वलकर कहते हैं कि कट्टर हिंदुत्व और उत्तर भारतीयों को निशाने पर रखकर ही शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अपनी जड़ों को मजबूत किया था। उनका कहना है कि इस वक्त शिवसेना सरकार में है और जिस तरीके की कट्टर हिंदुत्व की उनकी राजनीतिक छवि है वे इससे थोड़ा सा दूर हैं। यही वजह है कि उसका पूरा फायदा उठाने के लिए बाला साहब ठाकरे के भतीजे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे बढ़-चढ़कर आगे आ रहे हैं।

हरीश कहते हैं कि लेकिन इस बार राज ठाकरे जिस राज्य के लोगों को हमेशा निशाने पर ही रखते थे, इस बार वहां के मुख्यमंत्री का नाम लेकर और वहां की मिट्टी का तिलक लगाकर महाराष्ट्र की राजनीति में श्रीगणेश करने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का कहना है कि अब प्रदेश की राजनीति में उत्तर भारतीयों को निशाने पर लेने का चलन न सिर्फ बाहर हो गया है बल्कि इस तरह नफरत की राजनीति करने वालों को सत्ता भी हासिल नहीं होने वाली। वे कहते हैं कि यही वजह है न सिर्फ राज ठाकरे बल्कि शिवसेना अब उत्तर भारतीयों को निशाने पर लेने से बच रही है।

सिर्फ अयोध्या में आकर रामलला के दर्शन करने से ही महाराष्ट्र की राजनीति में किसी भी राजनीतिक पार्टी को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। यही बात महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के वरिष्ठ नेता अनिल शिंदे कहते हैं। वे कहते हैं कि आप उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की उपलब्धियां देखिए। कितने कम दिनों में उन्होंने अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया। कानून का पालन न करने वाले धार्मिक स्थलों से जिस तरीके से लाउड स्पीकर और माइक उतर रहे हैं, वह अपने आप में नजीर है। इसलिए अगर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से कुछ सीख कर महाराष्ट्र में बेहतर किया जा सकता हो, तो उसे महाराष्ट्र के लोगों के लिए करने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की सरकार ऐसा कुछ भी नहीं कर रही है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जिस तरीके से राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है वह बिल्कुल सही किया है। वे कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में जिस तरीके से मंदिर और खासकर मस्जिदों से माइक उतरवाए हैं, यह कानूनन सही किया है। उक्त नेता का कहना है कि राज ठाकरे भी योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर महाराष्ट्र में कानून का पालन कराने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है अगर कोई सरकार अच्छा काम कर रही है तो उसकी तारीफ करने में कोई बुराई नहीं होनी चाहिए, और फिर योगी आदित्यनाथ तो कानून व्यवस्था को लेकर भी बहुत बेहतर काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की प्राथमिकता में बुलडोजर भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना यूपी सरकार के लिए है।


लोगसत्ता न्यूज
Anilkumar Upadhyay